Thursday, June 9, 2011

कृष्ण के दर्शन गाय से ही





गोक्रांति अग्रदूत श्री गोपालमीणी महाराज ने गोकथा के दौरान कहा कि गोविंद एवं कृष्ण के दर्शन गाय से ही होते है। हर मनुष्य गाय को पाले, यदि न भी पाल सके तो उसे ह्द्रय में बसा ले। गाय का कार्य करने से ही हमे राम एवं कृष्ण मिलते है। उन्होंने कहा कि गाय की दिशा से ऋषियों को दिशा मिलती है। मनुष्य को गोदान करना चाहिए। जो गाय का बन जाता है वही गुरू का शिष्य बन जाता है। इस अवसर पर गोभक्तों ने कथा के दौरान हाथ उठाकर गोसेवा एवं गोसंवर्धन का संकल्प लिया। श्री गोपालमणी महाराज ने व्यसन मुक्ति पर बल दिया और कहा कि देश की स्थापना गौऋषियों से हुई है, लेकिन आज विडंबना यह है कि इस देश की सत्ता ऐसे लोगों के हाथ में है, जो गाय की रक्षा सही तरीके से नही कर पा रही है।
कार्यक्रम का संचालन ओम आचार्य के द्वारा किया गया। इस महोत्सव का पांच दिन तक समग्र विश्व में दिशा चैनल के द्वारा सीधा प्रसारण किया गया। गोभक्तों ने गो सेवा के लिए मुक्त हस्त से धन का दान भी दिया। गोधाम प्रचार विभाग के राव गुमानसिंह रानीवाड़ा एवं गणपत सुथार ने भी विशेष सहयोग प्रदान किया। सूरत से आए गो भक्त अर्जुनसिंह राजपुरोहित, जगदीश परिहार सहित श्रवणसिंह राव ने भी सहयोग प्रदान किया।

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