भास्कर न्यूज. चैन्नई।
निराश्रित गोवंश को बचाने के लिए हम आगे आए। गोसेवा एवं गोसंवर्धन करे। गोभूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराए तथा पर्यावरण की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहे। गोधाम पथमेड़ा प्रधान संरक्षक एवं संस्थापक स्वामी दत्तशरणानंद महाराज ने यह बात कही। वे चैन्नई महानगर में गोकथा महोत्सव के दौरान उपस्थित गोभक्तों को उदबोधन दे रहे थे।
गोकथा महोत्सव 12 जनवरी से शुरू होकर 16 जनवरी को सम्पन्न हुआ। कामधेनू कल्याण परिवार तमिलनाडू चैन्नई के तत्वावधान में आयोजित कथा में उन्होंनें कहा कि आज गोवशं कमाई के लिए कत्लखाने ले जाई जा रही है। गोभक्त आज आवारा हो गया है। इसलिये गाय बैचारा हो गई है। सारे प्राणियों में गोमाता पवित्र है। सबको जोडऩे वाली गोमाता की हम उपेक्षा कर रहे है। चैन्नई महानगर के वैपेरी उपनगर के ईवीके सम्पत्त रोड़ पर चुलै बस स्टेण्ड़ के पास पीटीसी चैंगलवाराय नाईकन ट्रस्ट में आयोजित कथा स्थल पर उन्होंने गो प्रेमियों से आह्वान किया कि हम भोजन से पहले गोग्रास अवश्य निकाले। गो से प्राप्त वस्तुओं का सेवन करे तथा गो गव्यों का उपयोग अधिक से अधिक करे। उन्होंनें गोमाता की महिमा को बड़े ही तार्किक एवं सरल रूप में समझाते हुए कहा कि जीवन में सम्पूर्ण शांतिमय यात्रा करनी हो तो गोमाता की सेवा अवश्य करनी चाहिए। गाय सभी को आनंद एवं शांति देती है। गाय को साक्षात भगवान का रूप बताया गया है। हम गाय की महिमा भूल गए है। गो माता के गुणगान को गोविंद की महिमा दी गई है।
मकर सक्रांति के पूण्य पर्व के मौके पर निराश्रित लाखों गोवंश के सेवार्थ एवं संरक्षणार्थ यहां आयोजित महोत्सव स्थल पर दत्तशरणानंद महाराज ने कहा कि सबका पालन पोषण गोमाता करती है। बौद्धिक एवं आध्यात्मिकता से भी गोमाता का अनंत उपकार है। गाय का स्थान बहुत ऊंचा है, लेकिन विडबंना है कि आज गोवंश दुखी है। संसार में भगवान से भी गाय का स्थान है। जन्म देने वाली माता से भी कई गुणा ऊंचा स्थान गाय को दिया गया है। गोमाता की अंनत शक्ति है। पवित्रता व शांति देती है। गाय से अधिक समरस कोई नही है। गोमाता सभी मजहबों व सम्प्रदायों से ऊपर है। गाय भारत का विराट रूप है। जहां सम्पूर्ण ब्रह्मांड को पोषण करने वाली गाय माता है।
निराश्रित गोवंश को बचाने के लिए हम आगे आए। गोसेवा एवं गोसंवर्धन करे। गोभूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराए तथा पर्यावरण की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहे। गोधाम पथमेड़ा प्रधान संरक्षक एवं संस्थापक स्वामी दत्तशरणानंद महाराज ने यह बात कही। वे चैन्नई महानगर में गोकथा महोत्सव के दौरान उपस्थित गोभक्तों को उदबोधन दे रहे थे।
गोकथा महोत्सव 12 जनवरी से शुरू होकर 16 जनवरी को सम्पन्न हुआ। कामधेनू कल्याण परिवार तमिलनाडू चैन्नई के तत्वावधान में आयोजित कथा में उन्होंनें कहा कि आज गोवशं कमाई के लिए कत्लखाने ले जाई जा रही है। गोभक्त आज आवारा हो गया है। इसलिये गाय बैचारा हो गई है। सारे प्राणियों में गोमाता पवित्र है। सबको जोडऩे वाली गोमाता की हम उपेक्षा कर रहे है। चैन्नई महानगर के वैपेरी उपनगर के ईवीके सम्पत्त रोड़ पर चुलै बस स्टेण्ड़ के पास पीटीसी चैंगलवाराय नाईकन ट्रस्ट में आयोजित कथा स्थल पर उन्होंने गो प्रेमियों से आह्वान किया कि हम भोजन से पहले गोग्रास अवश्य निकाले। गो से प्राप्त वस्तुओं का सेवन करे तथा गो गव्यों का उपयोग अधिक से अधिक करे। उन्होंनें गोमाता की महिमा को बड़े ही तार्किक एवं सरल रूप में समझाते हुए कहा कि जीवन में सम्पूर्ण शांतिमय यात्रा करनी हो तो गोमाता की सेवा अवश्य करनी चाहिए। गाय सभी को आनंद एवं शांति देती है। गाय को साक्षात भगवान का रूप बताया गया है। हम गाय की महिमा भूल गए है। गो माता के गुणगान को गोविंद की महिमा दी गई है।मकर सक्रांति के पूण्य पर्व के मौके पर निराश्रित लाखों गोवंश के सेवार्थ एवं संरक्षणार्थ यहां आयोजित महोत्सव स्थल पर दत्तशरणानंद महाराज ने कहा कि सबका पालन पोषण गोमाता करती है। बौद्धिक एवं आध्यात्मिकता से भी गोमाता का अनंत उपकार है। गाय का स्थान बहुत ऊंचा है, लेकिन विडबंना है कि आज गोवंश दुखी है। संसार में भगवान से भी गाय का स्थान है। जन्म देने वाली माता से भी कई गुणा ऊंचा स्थान गाय को दिया गया है। गोमाता की अंनत शक्ति है। पवित्रता व शांति देती है। गाय से अधिक समरस कोई नही है। गोमाता सभी मजहबों व सम्प्रदायों से ऊपर है। गाय भारत का विराट रूप है। जहां सम्पूर्ण ब्रह्मांड को पोषण करने वाली गाय माता है।
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