अगर कोई पूछे धरती पर स्वर्ग कहाँ है तो बिना सोचे समझे पथमेडा का नाम बता देना।
भारत बहुत बडा देश है हरेक भारत वासी के लिये संम्भव नहीं पोता कि पथमेडा जाकर गौ माता के दर्शन कर सके। जो मित्र भारत के विभिन्न शहरों मे रहते है उनके लिये गौ माता के आशीर्वाद से पथमेडा का दर्शन कराने का प्रयास कर रहा हूँ।
आनंदवन पथमेड़ा भारत देश की वह पावन व मनोरम भूमि हैं जिसे भगवान श्री कृष्णने कुरुक्षेत्र सें द्वारका जाते समय श्रावण भादों माह में रुक कर वृंदावन से लायी हुई भूमंड़ल की सर्वाधिक दुधारु जुझारु साहसी शौर्यवान सौम्यवान गायों के चरने व विचरनें के लिए चुना था। यह आनंदवन मारवाड़ काठियावाड़ व थारपारकर की गोपालन लोक सन्स्कृति का ललित संयोग हैं।साथ ही भूगर्भ से बह रही पावन सरस्वती व कच्छ के रण में फैली हुई सिंधु तथा धरा पर बहने वाली सावित्री नदी द्वारा जन्म-जन्म के पापों का शमन करनें वाले श्री कृष्ण कामधेनु एवं कल्पगुरु दत्तात्रेय की आराधना का परम पावन त्रिवेणी संगम स्थल है।
सन १९९३ में राष्ट्रव्यापी रचनात्मक गोसेवा अभियान का प्रारम्भ इसी स्थान से हुआ हैं।जिसके तहत सर्वप्रथम श्री गोपाल गोवर्धन गौशाला गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा की स्थापना एवं गोसेवा कार्यकारिणी का गठन करके उसमें संपूर्ण हिंदुऒं का प्रतिनिधित्व सुनिश्चत किया हैं।
परम पूजनीय स्वामी दत्त शरणानन्द महाराज ने इस स्थान को.स्वर्ग बना दिया है
मेरे को एक दोहा याद आ रहा है
को कवि वर्णन कर सके, पथमेडा का मूल।
इसके कण कण में बसी, गौ चरणों की धूल।।
कुछ विडियो लिंक दे रहा हूँ जिन्हे देख कर आप अपने आप को पथमेडा आने से नहीं रोक पाऒगे। आपको एक पल के लिये अहसास होगा जैसे कि आप पथमेडा में बैठे हो।
श्री गोधाम महातीर्थ पथमेडा भाग I
श्री गोधाम महातीर्थ पथमेडा भाग II
श्री गोधाम महातीर्थ पथमेडा भाग III
कुछ चित्र पोस्ट कर रहा हूँ जो विभिन्न साईटस से संग्रह किये गये।
अगर भारतीय संस्कृति को बचाना है तो गौ माता को बचाना ही होगा।





























भारत बहुत बडा देश है हरेक भारत वासी के लिये संम्भव नहीं पोता कि पथमेडा जाकर गौ माता के दर्शन कर सके। जो मित्र भारत के विभिन्न शहरों मे रहते है उनके लिये गौ माता के आशीर्वाद से पथमेडा का दर्शन कराने का प्रयास कर रहा हूँ।
आनंदवन पथमेड़ा भारत देश की वह पावन व मनोरम भूमि हैं जिसे भगवान श्री कृष्णने कुरुक्षेत्र सें द्वारका जाते समय श्रावण भादों माह में रुक कर वृंदावन से लायी हुई भूमंड़ल की सर्वाधिक दुधारु जुझारु साहसी शौर्यवान सौम्यवान गायों के चरने व विचरनें के लिए चुना था। यह आनंदवन मारवाड़ काठियावाड़ व थारपारकर की गोपालन लोक सन्स्कृति का ललित संयोग हैं।साथ ही भूगर्भ से बह रही पावन सरस्वती व कच्छ के रण में फैली हुई सिंधु तथा धरा पर बहने वाली सावित्री नदी द्वारा जन्म-जन्म के पापों का शमन करनें वाले श्री कृष्ण कामधेनु एवं कल्पगुरु दत्तात्रेय की आराधना का परम पावन त्रिवेणी संगम स्थल है।
सन १९९३ में राष्ट्रव्यापी रचनात्मक गोसेवा अभियान का प्रारम्भ इसी स्थान से हुआ हैं।जिसके तहत सर्वप्रथम श्री गोपाल गोवर्धन गौशाला गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा की स्थापना एवं गोसेवा कार्यकारिणी का गठन करके उसमें संपूर्ण हिंदुऒं का प्रतिनिधित्व सुनिश्चत किया हैं।
परम पूजनीय स्वामी दत्त शरणानन्द महाराज ने इस स्थान को.स्वर्ग बना दिया है
मेरे को एक दोहा याद आ रहा है
को कवि वर्णन कर सके, पथमेडा का मूल।
इसके कण कण में बसी, गौ चरणों की धूल।।
कुछ विडियो लिंक दे रहा हूँ जिन्हे देख कर आप अपने आप को पथमेडा आने से नहीं रोक पाऒगे। आपको एक पल के लिये अहसास होगा जैसे कि आप पथमेडा में बैठे हो।
श्री गोधाम महातीर्थ पथमेडा भाग I
श्री गोधाम महातीर्थ पथमेडा भाग II
श्री गोधाम महातीर्थ पथमेडा भाग III
कुछ चित्र पोस्ट कर रहा हूँ जो विभिन्न साईटस से संग्रह किये गये।
अगर भारतीय संस्कृति को बचाना है तो गौ माता को बचाना ही होगा।
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